जीएसटी काउंसिल की बैठक के नए निर्णय से मिली व्यापारियों/ कारोबारियों को राहत
जीएसटी परिषद की 53वीं बैठक 22 जून 2024 को नई दिल्ली में आयोजित की गई, जो पिछली बैठक के लगभग आठ महीने बाद हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता नवनियुक्त केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने की।लोकसभा चुनावों के बाद यह जीएसटी परिषद की पहली बैठक थी, जीएसटी काउंसिल ने कुछ अहम निर्णय लिए, जिन में से धारा 73 के तहत जारी डिमांड नोटिसों में राहत दिया जाना व्यापारियों/ कारोबारियों के लिए बहुत मायने रखता है ।
जिन व्यापारियों को विभाग द्वारा वर्ष 2017-2018, 2018-2019, 2019-2020 तक धारा 73 के तहत नोटिस जारी किये गए थे । ऐसे व्यापारी 31.03.2025 तक पूरा टैक्स जमा कर देंगे तो उनका ब्याज और पेनल्टी नहीं भरना पड़ेगा । इस निर्णय से देश में हजारों कारोबारियों ने राहत की सांस ली है ।
कॉर्पोरेट एडवोकेट बीरबल शर्मा का कहना है कि धारा 73 के तहत हजारों कारोबारियों को नोटिस जारी किए गए थे | जीएसटी काउंसिल की सिफारिश के अनुसार वित्त वर्ष 2017-2018, 2018-2019 और 2019-2020 के लिए सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 के तहत जारी डिमांड नोटिसों (अर्थात धोखाधड़ी , जानकारी छिपाने, या जानबूझकर गलतबायनी, इत्यादि से जुड़े मामले न हो ) के लिए ब्याज और जुर्माना माफ करने की सिफारिश की है, बशर्ते कि मांगे गए समस्त कर का भुगतान 31.03.2025 तक कर दिया जाए। इससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी ।
01 जुलाई 2017 को जीएसटी प्रभावी हुआ था। तत्कालीन परिस्थिति में जीएसटी जमा करने की तकनीकी पहलू से तमाम व्यापारी अनभिज्ञ थे, जिस कारण कर भुगतान में देरी चक्रवृद्धि ब्याज के तहत ब्याज की मांग बकाया थी ।
वर्ष 2017 से 2020 तक के लिए बहुत सारे व्यापारियों को विभाग द्वारा ब्याज और पेनल्टी के डिमांड नोटिस जारी किए गए थे । इन मामलों मे कई व्यापारी से विभाग द्वारा ब्याज और जुर्माना के डिमांड की रिकवरी भी की है, जिस कारण जिन व्यापारियों ने ब्याज और जुर्माना जमा करवा दिया है, उन्हें रिफंड मिलेगा या नहीं इससे असमंजस में हैं। और अपील संबंधी प्रकरण में भी काउंसिल द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है
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