जी हां, पति द्वारा पत्नी को घर चलाने का खर्चा और उसकी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्चा ना देना घरेलु हिंसा की श्रेणी का अपराध है, जिसके लिए पत्नी अपने पति के विरूद्ध मुकदमा दायर करा सकती है, बशर्ते कि उसका पति कमाने के लिए अयोग्य एवं अन्य कारणों से मजबूर ना हो |
महिलाओं को इस हिंसा से बचाव के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 3 में आर्थिक दुराचार को शामिल किया गया है जो कि महिलाओं के लिए एक सुरक्षा का हथियार है, जिसका अर्थ है ऐसा कोई आर्थिक स्रोत बंद करना जो महिला का हक अथवा जरूरत है, एवं जो रिती-रिवाज एवं कानूनी रूप से आवश्यक स्रोत माना जाता है, आर्थिक स्त्रोत रहने के स्थान तक ही सीमित नहीं है बल्कि गृहस्थी की सभी प्रकार की जरूरत है, बच्चों की जरूरत है, मायके से लाई गई वस्तुएं एवं धन गृहस्थी चलाने का हिस्सा, एवं निजी जरूरतों का खर्चा इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं जिनका पालन नहीं किया जाना एक दंडनीय अपराध है, पीड़ित महिला के सगे संबंधियों से दहेज़ अथवा किसी कीमती वस्तु या सम्पति की मांग करना आदि इस धारा के अंतर्गत अपराध माना गया है |
अतः उपरोक्त आधार पर पति द्वारा पत्नी को घर चलाने का खर्चा और उसकी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्चा ना देना घरेलु हिंसा के अपराध की श्रेणी में आता है |
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