यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है और जिसको उत्तर नहीं में है, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21(2) के अंतर्गत लोक अदालत का फैसला जो कि सेटलमेंट का हो या अन्य हो अंतिम माना जाता है, और इसके खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती, और इस फैसले को सभी पक्षों को मानना होगा व संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका दायर करने का अवसर भी सीमित है।
उपयुक्त लेख के आधार पर हम यह कह सकते है, की जहा एक और तो sub Section (2) of Section 21 के प्रावधानों में स्पष्ट कहा गया है, कि किसी भी पक्ष द्वारा लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती है, और फैसले को सभी पक्षों को मानना होगा |
वही दूसरी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर लोक अदालत के फैसले को अनुच्छेद 226, 227 के अधीन बहुत ही सीमित मामलों में चुनौती दी जा सकती है |
तो इस प्रकार निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है, कि sub Section (2) of Section 21 of the Legal Services Authority Act, 1987 में संशोधन करते हुए लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील किए जाने के निश्चित आधारों का दिया जाना आवश्यक है |
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