भारत में कोविड-19 महामारी में सरकार के आदेश को नजर अंदाज करना पड़ सकता है भारी || भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269,270

भारत में कोविड-19 महामारी में सरकार के आदेश को नजर अंदाज करना पड़ सकता है भारी संसार में  फैली इस  महामारी कोरोना वायरस कोविड-19 (Coronavirus disease 2019) से नि...

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भारत में कोविड-19 महामारी में सरकार के आदेश को नजर अंदाज करना पड़ सकता है भारी || भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269,270

भारत में कोविड-19 महामारी में सरकार के आदेश को नजर अंदाज करना पड़ सकता है भारी

संसार में  फैली इस  महामारी कोरोना वायरस कोविड-19 (Coronavirus disease 2019) से निपटने के लिए विश्‍व के सभी देश भरपूर प्रयास कर रहे है, भारत द्वारा भी पूरा प्रयास किया जा रहा है. भारत में इस महामारी को रोकने के लिए  123 साल पुराना कानून काम में लिया जा रहा है,  जिसके  तहत  गिरफ्तारी  व सजा तक का प्रावधान है। इस कानून के लागू होने से अगर कोई भी  व्यक्ति  सरकार के आदेश को नजर अंदाज करता है, तो उस व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान  भी है ।

महामारी रोक कानून 1897 (Epidemic Diseases Act-1897) का उपयोग अधिकारियों द्वारा किसी जगह, इलाका, शहर में आवाजाही रोकने, शिक्षण संस्थाओं को बंद करने, व किसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या किसी भी सार्वजनिक जगह से किसी भी व्यक्ति को बिना कारण बताये हॉस्पिटल भेजा जा सकता है व अलग-अलग रहने पर मजबूर किया जा सकता है, और अगर  कोई भी  व्यक्ति  सरकार के इस आदेश को नजर अंदाज करता है  तो Indian Panel Code-1860  धारा 188, के तहत  आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है ।

भारतीय दंड संहिता  की धारा 188 :-

धारा 188 कहती है की  यदि  कोई  जान-बूझ कर किसी  के जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा से खिलवाड़ करता है या बल्वा या दंगा कारित करता है ,  तो  उसे कम से कम  6  महीने की जेल और एक हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, या दोनों से, दंडित किया जा सकता है  ।

साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC)  की धारा 269 और 270 के तहत भी कार्यवाही की जा सकती है

भारतीय दंड संहिता की धारा 269 :-

भारतीय दंड संहिता की धारा 269 के अनुसार, जो कोई विधि विरुद्ध रूप से या उपेक्षा से ऐसा कोई कार्य करेगा, जिससे कि और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि, किसी व्यक्ति  के  जीवन  को  संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 6  मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जा सकता है  ।

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उदाहरण:-

 नीदर मल, 1902 PR No. 22 (Cr) 56 के मामले, में अभियुक्त, अम्बाला में   उस घर में  रहता था जहाँ प्लेग फ़ैल गया था, और वह प्लेग रोगी के संपर्क में आया था। और उस व्यक्ति को  प्लेग रोगी के साथ प्लेग रोगियों के लिए बनाये गए अस्पताल में ले जाया गया जहाँ उस रोगी की प्लेग रोग से  मृत्यु हो गयी। अभियुक्त को अधिकारिओ द्वारा कहीं भी न जाने की सख्त हिदायत दी गयी थी। इस हिदायत के बावजूद, अभियुक्त ट्रेन से  दूसरे शहर चला गया। यह अभिनिर्णित किया गया कि वह अभियुक्त इस धारा-269  के अंतर्गत बताए गए अपराध का दोषी था क्योंकि उसके पास यह विश्वास करने का पर्याप्त कारण था कि उसका कृत्य संकटपूर्ण है, और उसके कृत्य से एक ऐसा संक्रामक रोग फैलेगा जो आम व्यक्ति  के लिए संकटपूर्ण है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 270:-

भारतीय दंड संहिता की धारा 270 के अनुसार, जो कोई परिद्वेष (Malignantly) से ऐसा कोई कार्य करेगा जिससे कि, और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि, जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोक का संक्रमण फैलना संभाव्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 2 वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जा सकता है  ।

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